कलेक्टर रविन्द्र कुमार ने इस वजह से योगी सरकार पे ठोका केस…पूरा पढ़े इस रिपोर्ट मे

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सीएम की सपथ लेते ही योगी आदित्यनाथ ने ये वादा किया था कि राज्य से अपराध और अपराधियों का खात्मा कर देंगे।

उन्होंने इस बात को अपने भाषण में ये साफ़ किया था कि यूपी को अपराध मुक्त बनाने के लिए सरकारी अफ़सरों से लेकर प्रशासन तक हर किसी को काम करना होगा, और जो काम नही कर पाएगा या किसी भी आरोप में दोषी पाया गया तो सीएम साहब खुद उसे सज़ा देंगे.

सीएम बनते ही योगी भूल गये अपने तमाम वायदे

लेकिन जैसा हमेशा से होता रहा हैं वैसा ही योगी के राज में भी हुआ सत्ता का स्वाद चखते ही योगी साहब न केवल खुद अपने वायदे भूल गये. बल्कि अब हालात ये हैं कि राज्य में अगर कोई ईमानदार अफसर उन्हें उनके वायदे याद भी दिलाता हैं तो योगी की नज़र में वो अफसर सबसे बड़ा अपराधी बन जाता है.

ऊतर प्रदेश का यह मामला इस बात की भी पुष्टि करता है। अगर कोई ईमानदार अफसर उन्हें उनके वायदे याद भी दिलाता हैं तो योगी की नज़र में वो अफसर सबसे बड़ा अपराधी बन जाता है।

जिन ईमानदार अफ़सरों को योगी सरकार द्वारा सम्मानित किया जाना चाहिए था उन्हें अपना काम ईमानदारी से करने के लिए पहले योगी सरकार से ही लड़ना पड़ रहा है.

जी हाँ हम बात कर रहे है यूपी के फर्रुखाबाद जिले के जिलाधिकारी और सीएम की लड़ाई इसी बात का सबूत है.

दरअसल, हुआ कुछ ऐसा कि यहाँ के जिला अस्पताल में एक महीने के अंदर अंदर ही 49 मासूम बच्चे प्रशासन की बड़ी लापरवाही के चलते देहांत की गोद में सो गये तो मामले को गंभीरता से लेते हुए इलाके के डीएम ने न्यायिक जाँच कराने के आदेश जारी कर दिए.

जब डीएम ने न्यायिक जांच बैठाई तो पता चला कि सभी बच्चो की देहांत अस्पताल में ओक्सिजन की कमी से हुई है. जिसके बाद तुरत संज्ञान लेते हुए डीएम साहब ने दोषी CMO और CMS के खिलाफ बाकायदा FIR दर्ज करने का आदेश दे दिया.

लेकिन शायद योगी सरकार को डीएम की फुर्ती भरी ये कार्यवाही हजम नही हुई जिसके चलते सरकार ने डीएम के इस कृत्य को डीएम की बदनीयती तक करार दे दिया और FIR पर कार्यवाही न करने का आदेश जारी कर दिया।

डीएम की ईमानदारी की सज़ा यही नहीं रुकी योगी सरकार ने डीएम का तबादला भी करा दिया.

जब सरकार के इस रवैये पर सवाल उठने लगे तो सरकार की ओर से कहा गया कि,

“कोई भी देहांत ओक्सिजन की कमी से नहीं हुई. डीएम साहब झूठ बोल रहे हैं .”

सरकार अपने प्रशासन की लापरवाही को छुपाने के लिए भले ही कुछ भी तर्क दें लेकिन दूसरी तरफ डीएम द्वारा CMO और CMS पर मुकदमा दर्ज कराने से फर्रुखाबाद जिला अस्पताल के सारे डॉक्टर्स इनके समर्थन में हड़ताल पर बैठ गये है.

सरकार पर लगा हैं 49 बच्चों की देहांत का आरोप

गौरतलब हैं कि पीछे साल ओक्सिजन की कमी से ही गोरखपुर अस्पताल में हुई मासूमो की देहांत का मामला अभी ठंडा भी नही हुआ था कि अब ये फर्रुखाबाद वाला मामला सामने आने से एक बार फिर योगी सरकार कटघरे में आ गुई है.

खबरों की माने तो 20 जुलाई से 21 अगस्त के अंतराल में यहाँ पर 49 बच्चों की देहांत हो गयी थी जिससे डीएम रविन्द्र कुमार नाराज हो गये और मजिस्ट्रेट जांच बैठा दी थी.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जब डीएम ने मरने वाले बच्चों की रिपोर्ट मांगी तो CMO और CMS ने संदेहास्पद रिपोर्ट सौपी जिसके बाद मरने वाले बच्चों के रिश्तेदारों से सम्पर्क किया गया था.

इस दौरान ही ये खुलासा हुआ कि डॉक्टर्स ने समय पर ओक्सिजन की नाली नहीं लगायी और कोई दवा भी नहीं दी जिससे ही बच्चो की देहांत हुई।

Source- http://viralinindia.net/news/dm-ravindra/42403/

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