कौन थे मुस्लीम वैज्ञानिक इब्न-ए-सीना जिन्होंने महज़10 साल की उम्र में ही क़ुरआन हिफ़्ज़ कर लिया था

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इस रिपोर्ट में हम आपको उस महान मुस्लिम वैज्ञानिक के बारे बताएंगे जिन्होंने महज़ 10 साल की उम्र में कुरान हिफ़्ज़ कर लिया था। इस रिपोर्ट को ज्यादा लम्बा ना करते हुए हम आपको कम शब्दों में ज्यादा से ज्यादा बताने की कोशिश करेंगे।
मुस्लिम वैज्ञानिक इब्न-ए-सीना जिनका पूरा नाम अली-अल-हुसैन बिन अब्दुल्लाह बिन अल-हसनबिन अली बिन सीना है। इनका जन्म 22 अगस्त 980 ईस्वी में बुखारा में हुआ था।

बताया जाता है इब्न-ए-सीना महज़ 10 साल की उम्र में ही कुरान हिफ़्ज़ कर लिए थे। बता दे कि इनकी गणना इस्लाम के प्रमुख डाक्टर और दर्शिनिकों में होती है। एक मर्तबा बुखारा के सुलतान नूह इब्न मंसूर बीमार हो गये। वहां के सभी हकीमो की दवाइयां नूर इब्न मंसूर पर काम नही किया। सब के सब हाकिम तांग आ गए तब इब्न-ए-सीना ने उस बीमारी का इलाज किया था उस समय उनका उम्र 18 साल था।

 

इब्न-ए-सीना की दवाई से स्वस्थ हुए सुल्तान इब्न मंसूर ने पुरष्कार में एक पुस्तकालय खुलवा कर दिया था। इब्न-ए-सीना स्मरण शक्ति मे बहुत तेज थे जिससे उन्होंने पूरा पुस्कालय ही छान मारा और काफी सारे जानकारी एकत्रित किये। आगे चलकर उन्होंने ने 21 साल की उम्र पहली किताब लिखी।

अबू अली सीना ने 21 बड़ी और 24 छोटी किताबें लिखीं जबकि कुछ का मानना है कि उन्होंने 99 किताबों की रचना की। वही इनकी मसहूर किताब की बात करे तो “किताब अल कानून” है जो चिकित्सा की एक मशहूर किताब है।
ऐसे उनकी कई मसहूर किताबो का अन्य भाषओं में भी अनुवाद किया गया है।
इब्न-ए-सीना का इंतक़ाल 21 जून 1037 ईस्वी में ईरान में हुआ था।

स्रोत- नया भारत टाइम्स

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