पहले BJP शोशल मिडिया पर महारथ थी, अब कांग्रेस कार्यकर्तां का पलड़ा भारी हो गया जिससे BJP परेशान !

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2014 चुनाव में मोदी नीति ने एक दफा सभी अपने-परायों को सिखाया कि राजनीति सोशल मीडिया से भी की जा सकती है। प्रधानमंत्री बनने हेतु फेसबुक , ट्विटर का कचूमर उपयोग हो सकता है।
14 के बाद अर्थात मोदी जी के प्रधान बनने के बाद सभी किस्म के दल बाकायदा सोशल मीडिया सेल बनाकर अपने कार्यकर्ताओं को लाइक करना और कमेन्ट करना सिखाने लगे। कांग्रेस को नजदीक से देखा , सुना है । इसमें भी उस किस्म के सेल बनते बिगड़ते रहे हैं 14 के बाद से । विगत वर्षों में कांग्रेसी कार्यकर्ता, नेता लाइक और कमेन्ट करना बेहतर ढंग से सीख पाए हैं। बड़े नेताओं के साथ सेल्फी , इक्का दुक्का अफवाही न्यूज़ पोर्टल, कुछ मरे हुए पेज भी वे बना लिए हैं लेकिन ईमानदारी से कहा जाए तो 2016 तक पासंग बराबर भी नही हुए थे भाजपा के SM सेल के..!
कुछ उभरते कांग्रेसी युवा जो तकनीक से जल्दी तालमेल बैठा सके वे सारे देश के कांग्रेसियों को मित्रता रिक्वेस्ट भेजकर मित्रों की संख्या 5000 तक पंहुचा लिए और इसका फल यह मिला कि वे कुछ भी पोस्ट करते हैं तो वही 5000 कांग्रेसी धराधर लाइक्स ठोंककर उनके लाइक्स को 200-400 तक पहुंचा देते हैं। यह तकनीक अब सब जान गए हैं और स्वयम्भू महारथी बने बैठे हैं जबकि सच यह है कि उनको लाइक करनेवाले लोग सिर्फ और सिर्फ कांग्रेसी लोग ही होते हैं न कि न्यूट्रल जमात ।

क्या यही सोशल मीडिया का उपयोग है। क्या यही करके भाजपा अपना आधार बढ़ाया है नही कतई नही भाजपा का आधार वे बढाए थे जो..
1. स्वयंसेवक की तरह खुद की पहचान छिपाकर न्यूट्रल पेज और बड़े बड़े ग्रुप्स बनाए और फिर उन पेज और ग्रुप से अफवाही पोस्ट , तथ्य को तोड़ मरोड़कर बनाए गए पोस्ट , जोक्स इत्यादि के माध्यम से ‘ न्यूट्रल’ युवाओं के मन में यह भर पाए थे कि कांग्रेस ने आजतक कुछ नही किया और देश बचाना है तो मोदी को चुनो ।
2. जो नेता नही थे तकनीशियन थे और FB twitter के सिद्धहस्त थे । नेताओं और मुख्यधारा के कार्यकर्ताओं का काम facebook पर नही है। तकनीशियन लाइक्स और जय मोदी जय राहुल से बहुत अधिक कर पाने में सक्षम होते हैं।
3. घालमेल नही होने से उनके मुख्यधारा के कार्यकर्ता जमीन पर काम करते रहे और तकनीकी रूप से उन्नत सोशल मीडियाबाज़ मुख्य रूप से न्यूट्रल वोटर को मोदी के पक्ष में मोड़ते रहे.और सरकार बना लिऐ..!
लेकिन 2016 के बाद काँग्रेस में बदलाव जरुर दिखा शोशल मिडिया पर..
जब राहुल गाँधी शोशल मिडिया पर नही थे तब मोदी जी के बहुत अधिक फॉलोवर्स थे, इसी कारण वो 2014 का चुनाव भी जीते थे लेकिन मोदीजी की टीम ने झूठ का सहारा लिया था वो कांग्रेस नेताओं की छवि को बदनाम कर रहे थे अभी भी कर रहे है लेकिन अब कांग्रेस की टीम उन्हे जवाब देने लग गयी है इससे उनकी रफ्तार को भी लगाम लगा है.

वैसे तो श्री राहुल गांधी के फॉलोअर मोदीजी की तुलना मे कम है लेकिन जब श्री राहुल गांधी ट्वीट करते है तब उनके एक ट्वीट 15/20K के बीच लाइक्स आ जाते है क्योकि 6.3M फोलोवर है और मोदीजी के भी 2/3K बीच एक ट्वीट पर लाइक आ पाते है जबकि 42M फोलोवर है पिछले कुछ दिनों से देख रहे है राहुल गांधी के फॉलोअर बढ रहे है PM मोदी के घटते जा रहे है, राहुल गांधी ने अमेरिका मे जिस प्रकार अपनी काबिलीयत दिखाई है उससे युवा जबरदस्त प्रभावित है वो राहुल गांधी जी को अपना पीएम के रुप मे देखने लगे है इसी से उनके विरोधी लेखक भी राहुल के साथ आने लगे है. प्रशंसा कर रहें है..!
वैसे तो कांग्रेस सोशल मीडिया अब काफी मजबूत है लेकिन आज भी एक तबका आदर सम्मान से वंचित है जी हॉ आज कांग्रेस मे जो सोशल मीडिया पर भक्तो को मुंहतोड़ जवाब दे रहे है वो बिना पद के काम कर रहे है कुछ लोग अपना पढाई के अतिरिक्त समय निकालकर कांग्रेस को दे रहे है एक वाजिब बात है।

आज चाहे राष्ट्रीय टीम हो या राज्य टीम जो पद लेके बैठा है वो कभी भाजपा को जवाब नही देता है उनका काम सिर्फ दिन मे एकाध ट्वीट या पोस्ट करना काम होता है लेकिन जो काँग्रेस के समर्थक हैं वो भक्तो से लड रहे है वो पूरी रात जागकर भाजपा ग्रुप्स में सेंध लगा रहे है आज कांग्रेस जो सोशल मीडिया पर नजर आ रही है वो कांग्रेस के छोटै और निस्वार्थ सोशल मीडिया सिपाहियो के कारण आ रही है, राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाना ही इनका सपना है इसलिए निस्वार्थ रुप से काम करने वाले कांग्रेस सिपाहियों सलाम उनके जज्बे को हौसले को.।
इसका ताकत आप इससे अंदाजा लगा सकते है जब भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ये कहते हो. देश की युवा अब शोशल मिडिया पर ध्यान ना दें विरोधी लोग कैंपेंन चला रहें है. गृहमंत्री राजनाथ सिंह का बयान आया शोशल मिडिया अब झुठ का बाजार बन गया विरोधी लोग हावी हो गऐ अब शोशल मिडिया हो गऐ.! उसी तरह अरुण जेटली, निर्मला सीतारमण, विजय रुपाणी जैसे नेताओं का कहना पड़ रहा है अब शोशल मिडिया पर भरोसा ना करें.। नारों और विकास जमीन पर देखे शोशल मिडिया पर ना विश्वास करे.!

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