देश आंदोलन के रास्ते चल पड़ा है, मोदी का ’56’ इंच का सीना कहाँ है.?

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वैसे माना जाये तो अब हमारा देश देश नही रहा बल्कि अपनी इच्छा पुरा करने वाला आंदोलन, हिंसा करने का अखाड़ा बना दिया गया है।

हर कोई अपनी मन मुताविक चाहता हैं और ना मिलने पर प्रदर्शन, आगजनी, बलात्कार, लुट, दंगे, हत्या जैसे हिंसा को अपना लेते है और सरकार को, सुप्रीम कोर्ट को झुकाने के लिये निकल पड़ते है।

मै समझता हूँ ये सरकार निकम्मी है जो चुपचाप देखती है सहती है, वर्ना ऐसे हिंसा करनो वाले लोगो को सख्ती से निपटना चाहिये। चाहे साम, दाम, दंड, भेद कोई नीति हो.!

देश बड़ा होता है, सर्वप्रथम होता है ना कि किसी की ख्वाईश.? हम किसी की ख्वाईश पुरी करने के लिये देश को हिंसा में नही झोंक सकते। संस्कृति को खत्म नही कर सकते। मोदी साहब को सख्ती से निपटना चाहिये बहुत हो गया ड्रामा कभी पद्दमावती पर आंदोलन , तो कभी राम रहिम पर, तो कभी दलित संगठनो पर, तो कभी पेपर लीक पर..?

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