मोदी जी भारतीय मुस्लमान जिन्ना वाले नहीं, मौलाना आज़ाद और ऐपीजे अब्दुल कलाम वाले मुस्लमान हैं।

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भारतीय मुसलमानों ने जिन्ना को तो 1947 में ही नकार दिया था जब चुनने का वक्त आया तो जिन्ना का पाकिस्तान नहीं, गांधी, नेहरू, पटेल, मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद का भारत चुना। भारतीय मुस्लमान जिन्ना वाले नहीं, मौलाना आज़ाद और अब्दुल कलाम वाले हैं।
AMU में 1938 से लटकी जिन्ना की फोटो का विरोध आज क्यों?
जिन्ना ना कभी भारतीय मुस्लमान आदर्श रहा है न रहेगा ये तो मुल्क की समस्याओं से ध्यान हटाने का बहाना मात्र है, बेरोजगारी, नोट की कमी, बलात्कार आदि से ध्यान हटाने के लिए समय-समय पर ऐसे कार्यक्रम चलते रहेंगे अपने मुल्क में। सुनिए ये विरोध जिन्ना का नहीं है ये तो 2019 की तैयारी है। अगर जिन्ना का विरोध होता तो ये विरोध जिन्ना महल का करते जिस पर महाराष्ट्र सरकार करोड़ो रूपये रख-रखाव में खर्च करती है। या फिर जिन्ना टावर का करते जिस पर आंध्रप्रदेश सरकार खर्च करती है।

अगर विरोध जिन्ना का होता तो ये विरोध ब्रिटानिया बिस्किट, गो एयर, आईपीएल की टीम किंग्स एलेवन पंजाब, और वाडिया ग्रुप का करते जिसके मालिक जिन्ना की इकलौती बेटी, दीना जिन्ना के पुत्र नुस्ली वाडिया और जहांगीर वाडिया हैं। जिन्ना तो बहाना असली मक़सद मुल समस्याओं से हमारा आपका ध्यान हटाना है।
जिन्ना का तस्वीर हटवाना कौन सी बड़ी समस्या है सरकार अगर चाहे तो तुरंत हटवा सकती है उत्तर प्रदेश की सरकार बिना हो हल्ला के ऐसा कर सकती थी लेकिन ऐसा करने से वोट का polorization कैसे होगा ? देशभक्ति की ब्रांडिंग कैसे होगी, ये वही लोग हैं जो जिन्ना की मजार पर चादर चढ़ाते हैं, पाकिस्तान जाते हैं बिरयानी खाते हैं तोहफ़ा लाते हैं और देश में जिन्ना का विरोध कर देशभक्ति का ढोंग करते हैं।

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