राहुल गाँधी के इस कदम से डर गई BJP और मोदी, 2019 में होगी मोदी की बड़ी हार !

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एक तरफ भारत के प्रधानमंत्री जो टेलीप्रॉम्प्टर के सहारे भाषण पढ़ते हैं वरना झूठ और बेसिरपैर की कॉमेडी नुमा बातें करते हैं। दूसरी तरफ ईमानदारी और सत्य के तथ्यों के साथ झूठ शिरोमणि का पोल खोलते राहुल गाँधी विदेशों में भी भाषायी प्रवीणता के साथ भाषण करते हैं।
हाँ राहुल के बातों में तथ्यों सूचनाओं, डेटा को सत्यता के साथ जनता के सामने रखने के लिए जरूर कुछ नोटिंग्स रखते हैं जो सर्वथा उचित है बनिस्पत इसके की जिम्मेदार नेता होते हुए भी झूठ और बकवास बोलना।

 

ये अनर्गल और झूठ बोल जनता को गुमराह करना अगर भाजपा नेता कोई विशेष कला समझते हैं तो उनकी बुद्धि को भगवान सुधारें। राहुल गाँधी से बीजेपी को कितना डर लगता है?? इसका अंदाजा सिर्फ इससे ही लगा लीजिये की इनके राष्ट्रीय प्रवक्ता, प्रदेश प्रवक्ता, प्रदेश मंत्री, केन्द्रीय मन्त्रियों का कई दर्जनों का समूह एक सुर में राहुल गाँधी का सुमिरन करता है, कीर्तन करता है।
राहुल गाँधी के 15 मिनट के भाषण का जवाब किसी भाजपाई के पास नहीं होता, भाजपा नेता तथ्यों पर बात नहीं कर सकते, जवाब नहीं दे सकते, उपहास करते हैं और बदले में उपहास बर्दाश्त करने की ताकत नहीं।
इन भाजपा नेताओं को गूगल पर मोदी लिख के सर्च करना चाहिए, इतने जोक्स मिलेंगे, अपराधी में नाम मिलेगा की वो चौंक जायेंगे।

सोशल मीडिया पर पीएम मोदी को लोग फेंकूँ कहते हैं, उनके कपिल शर्मा कॉमेडियन की तरह कॉमेडी करते फोटो व वीडियो की भरमार मिल जाएगी।
एक फिल्मी डायलॉग याद आता है की जिन के खुद के घर शीशे के हों उन्हें दूसरों के घर पर पत्थर नहीं मारने चाहिए। बीजेपी प्रवक्ताओं/नेताओं को ध्यान रखना चाहिए कि उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष व घोटालेबाज पुत्र के पिता अमित शाह, साथ ही सामूहिक हत्या व दंगा फैलाने के आरोपी नरेन्द्र मोदी जी जिन्हें उनके ही जीवित सबसे वरिष्ठ नेता व पूर्व प्रधानमंत्री ने उन्हें दँगा और हत्या रोक राजधर्म निभाने की सीख दी थी। वो यूँ ही तो नहीं दिया होगा।

ऐसे लोगों और उनके समर्थकों को मुँह नहीं है त्याग के अप्रतिम प्रतिमान स्थापित किये परिवार के सत्यनिष्ठ नेता राहुल गाँधी पर टिप्पणी करने का। बीजेपी नेता जब खुद सम्मान की राजनीतिक भाषा नहीं जानते तो उन्हें कत्तई अधिकार नहीं कि वो या उनके नेताओं से सम्मानजनक राजनीतिक भाषा का प्रयोग किया जाए। इसलिऐ राहुल गाँधी के अक्रामक से भाजपा और संघ को अगले लोकसभा चुनाव में बड़ी हार का डर सताने लगा है।

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