क्या हुआ जब माँ ने मुआफ़ नही किया बेटे की जान नही निकली… एक सबक़ आमोज़ वाकिया आखिर तक पोस्ट पढ़ें

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क़ुरआन माँ बाप के बारे में कहता हैः- तुम्हारे रब ने फ़ैसला कर दिया है कि उस (अल्लाह) के सिवा किसी की बन्दगी न करो और माँ-बाप के साथ अच्छा बरताओ करो। अगर उनमें से कोई एक या दोनों ही तुम्हारे सामने बुढ़ापे की मंज़िल पर पहुँच जाएँ तो उन्हें ‘उफ़’ तक न कहो और न उन्हें झिड़को, बल्कि उनसे मेहरबानी से बात करो। क़ुरआने मजीद का यह हुक्म हर मुसलमान के लिये वाजिब है अल्लाह अल्लाह ख़ुदा वन्दे आलम के नज़दीक वालिदैन की यह अज़मत व मंज़िलत है कि उन के सख़्त और तकलीफ़ वाले रवय्ये पर भी औलाद को लफ़्ज़े उफ़ भी कहना उन के मरतबे के ख़िलाफ़ है

कहाँ कि उन के साथ बे अदबी और गुस्ताख़ी और बद सुलूकी से पैश आया जाये हालांकि लफ़्ज़े उफ़ कहना कोई बहुत बड़ी बेअहतेरामी नहीं है आम बात चीत में इस लफ़्ज़ को बुरा नहीं समझा जाता लेकिन इस लफ़्ज़ से मिज़ाज के ख़राब होने की बू आती है लिहाज़ा इस को भी ख़ुदा वन्दे आलम ने वालिदैन की शान के ख़िलाफ़ क़रार दिया है। इस्लाम ने औलाद को माँ बाप के लिए कई हुक्म दिए हैं, जिनको मानना उनके लिए इतना ही ज़रूरी है, जितना कि खुदा के सिवा किसी ओर की इबादत न करना।

इस्लाम कहता है, ‘अपने माँ बाप के साथ अच्छा सुलूक करो। खुदा से उनके लिए दुआ करो कि वह उनपर वैसा ही करम करे जैसा बचपन मै उसके पेरेन्टस ने उस पर किया। अपने माँ बाप के अहतेराम में कुछ बातें शामिल हैः उनसे सच्चे दिल से मुहब्बत करें। हर वक़्त उन्हें खुश रखने की कोशिश करें। अपनी कमाई दौलत, माल उनसे न छुपाएँ। माँ बाप को उनका नाम लेकर न पुकारें। अल्लाह को खुश करना हो तो अपने माँ बाप को मुहब्बत भरी निगाह से देखो।

अपने माँ बाप से अच्छा सुलूक करोगे तो तुम्हारे बेटे तुम्हारे साथ अच्छा सुलूक करेंगे। माँ बाप से अदब से बात करे, डांट डपट करना अदब के खिलाफ है। दुनिया में पूरी तरह उनका साथ दो। माँ बाप की नाफरमानी से बचो, क्योंकि माँ बाप की खुशनूदी में अल्लाह की खुशनूदी है और उनकी नाराज़गी में अल्लाह की नाराज़गी। अगर चाहते हो कि खुदा तुम्हारे काम में फायदा दे, तो अपने माँ बाप से रिश्तेदारों से अच्छा सुलूक बनाए रखे।

कभी कभी कब्र पर जाया करे, और उनके लिए दुआ करो। दुआ करो कि ‘ये अल्लाह उनपर वैसा ही रहम करना जैसा उन्होंने मेरे बचपन में मेरी परवरिश के वक़्त किया था। आज हम अपनी इन्हीं मज़हबी बातों से भटक गये है, हम अपने माँ बाप को अहतेराम देने के बजाय हम अपनी दुनियावी ख्वाहिशों के लिए उनसे लड़ते झगड़ते हैं, मरने के बाद उनके कब्र की ज्ञियारत तो बहुत दूर की बात है उनके लिए कोई सद्का खैरात तक नहीं करते।

बुढापे में उनकी ख़िदमात के बजाय अपने दुनिया के फुजूल कामों में लगे रहते है। अल्लाह से मेरी ये दुआ है कि वो हमें इन गुनाहों से बचाए।वालिदैन की फ़ज़ीलत रसूले ख़ुदा (स.) के नज़दीक
रसूले ख़ुदा (स.) ने इरशाद फ़रमायाः- माँ बाप की बद दुआ से बचो क्यों कि वोह बादलों को फाड़ कर मक़बूलियत के दरवाज़े तक पहुंचती है और क़बूल होती हैं और वालिदा की बद दुआ तो तलवार से ज़्यादा तेज़ होती है और वालिदा से बदतमीज़ी करने वाला गुनाहे कबीरा का मुरतकिब है जो ऐसा गुनाह है

जो माफ़ नहीं किया जायेगा लिखा है कि एक मरतबा रसूले ख़ुदा (स.) से किसी ने मशवेरा किया तो आप ने उस से फ़रमाया कि क्या तेरी माँ ज़िन्दा है उसने कहा हाँ मेरी माँ ज़िन्दा है तो आप ने फ़रमाया उसका अहतेराम और इकराम करो क्यों कि उसके पैर के नीचे जन्नत है। इमाम जाफ़रे सादिक़ अलैहिस्सलाम फ़रमाते हैं कि अपने माँ बाप के साछ ऐसा बरताओ करो जैसा अपने बच्चों के साथ करते हो और दूसरे की औरतों की हिफ़ाज़त करो ताकि वोह तुम्हारी औरतों की हिफ़ाज़त करें और वालिदैन की तरफ़ से आक़ होने से बचो जन्नत ने ख़ुशबू एक साल की दूरी से सूंगी जा सकती है

लेकिन वालिदैन का आक़ होने वाला उसे किसी तरह सूंग न सकेगा और वालिदैन के आक़ होने के लिये लफ़्ज़े उफ़ कहना काफ़ी है।
इमाम जाफ़रे सादिक़ अलैहिस्सलाम फ़रमाते हैं कि जो लोग अपने वालिदैन की तरफ़ ग़ुस्से से देखें चाहे वोह उन पर ज़्यादती न कर रहे हों ख़ुदा वन्दे आलम उन की नमाज़ क़बूल नहीं करता।
रसूले ख़ुदा (स.) से मालूम किया गया कि माँ बाप के औलाद पर क्या हुक़ूक़ हैं तो आप ने फ़रमायाः उनका नाम न लो उनके आगे न चलो उनके आगे न बैठो उन से बदकलामी न करो।

इमाम जाफ़रे सादिक़ अलैहिस्सलाम से किसी ने पूछा कि वालिदैन के साथ अहसान करने का क्या मतलब है आप ने फ़रमायाः माँ बाप से अच्छा सुलूक करो। मालूम किया गया कि क़ुरआन की इस आयत का क्या मतलब है तो आप ने फ़रमाया उन से अच्छा बरताओ करो उन को जिस चीज़ की ज़रूरत हो उन के बिना मांगे देदो चाहे वोह माल दार ही क्यों न हों फिर पूछ कि इस आयत का क्या मतलब है कि उन में से एक या दोनों बूढ़े हो जायें तो उन से उफ़ भी मत कहो 

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