बाढ़ में तिरंगे को सलाम करते इस बच्चे हैदर अली के साथ जो हुआ, उस पर विश्वास नहीं होता

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15 अगस्त 2017. ठीक एक साल पहले की बात है. स्वतंत्रता दिवस पर एक तस्वीर सोशल मीडिया पर आई और उसे देख लोग भावुक हो गए. जमके शेयर किया. तस्वीर बाढ़ से प्रभावित असम के धुबरी जिले के लश्कारा प्राइमरी स्कूल की थी, जहां चार शिक्षक और दो बच्चे स्वतंत्रता दिवस मनाने के लिए पानी की परवाह किए बिना पहुंचे थे. तस्वीर में चार लोग दिख रहे हैं. पर सबकी नजर गर्दन तक पानी में डूबे दो बच्चों पर अटक गई. वो इसलिए कि इस हालत में भी ये तिरंगे को सलाम कर रहे थे. जश्न मना रहे थे.

पर अब एक दूसरी खबर आई है. इसी तस्वीर को लेकर. हाल ही में आई वो नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन वाली रिपोर्ट तो आपको याद ही होगी, जिसमें असम में रह रहे अवैध नागरिकों की पहचान करनी थी. अब इसका कंप्लीट ड्राफ्ट आ गया है, जिसमें 40 लाख लोगों के नाम आए हैं मगर इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक लिस्ट में इस तस्वीर में दिख रहे एक बच्चे का नाम नहीं है. माने वो कथित तौर पर अब असम का नागरिक ही नहीं भारत का भी नागरिक नहीं है. इस बच्चे का नाम है हैदोर अली खान.

यही वजह है कि पिछले साल गर्व से भारतीय झंडे को सैल्यूट करने वाला 10 साल का हैदोर अली अब परेशान है. आपको जान के ताज्जुब होगा होगा कि हैदोर के परिवार के अन्य लोगों का नाम इस लिस्ट में शामिल है. हैदोर की मां जॉयगन खातून ने कहा कि हैदोर का नाम लिस्ट में नहीं है मगर उसके भाई और बहन का नाम उसमें है. हैदोर की मां एक स्कूल में कुक का काम करती हैं और उनकी तनख्वाह सिर्फ एक हजार रुपये है. इसी में उनको गुजारा करना होता है. उनके पति भी नहीं हैं. उन्होंने सरकार से गुजारिश की है कि उनके बेटे का नाम एनआरसी लिस्ट में शामिल कर लिया जाए.

हैदोर के स्कूल वाले भी इस खबर से नाराज हैं. नक्सारा लोअर प्राइमरी स्कूल में टीचर मिनाजुर रहमान ने कहा कि ये बहुत दुखी करने वाला है कि हैदोर के साथ ऐसा हुआ. उस हैदोर के साथ जो पिछले स्वतंत्रता दिवस पर पानी में तैर कर आया और झंडा रोहण करवाया. हेडमास्टर ताजेन सिकदर ने कहा कि इस बार के झंडा रोहण कार्यक्रम में भी हैदोर आया था. उनका कहना है कि उन्होंने हैदोर की मां को भरोसा दिलाया है कि उसका नाम जरूर एनआरसी में आ जाएगा.

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