पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का निधन, देश में शोक की लहर-

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भारतीय जनता पार्टी के 93 वर्षीय दिग्गज नेता को किडनी ट्रैक्ट इंफेक्शन, यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन, पेशाब आने में दिक्कत और सीने में जकड़न की शिकायत के बाद 11 जून को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, दिल्ली (एम्स) में भर्ती कराया गया था. इन बीमारियों के अलावा अटल बिहारी वाजपेयी सबसे ज्यादा पीड़ित डिमेंशिया से पीड़ित थे।

दरअसल, डिमेंशिया एक अवस्था है। जिसमें इंसान की याददाश्त कमजोर हो जाती है और वह अपने रोजमर्रा के काम भी ठीक से नहीं कर पाता है और वह हर बात भूलता जाता है। अकसर लोग डिमेंशिया को सिर्फ एक भूलने की बीमारी नहीं बल्कि याददाश्त की भी समस्या होती है। अटल बिहारी वाजपेयी की हालत बिगड़ने पर बुधवार की शाम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें देखने के लिए एम्स पहुंचे थे। वहीं तभी से नेताओं का एम्स जाने का सिलसिला जारी था।

मोदी के अलावा रेल मंत्री पीयूष गोयल और भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी भी वाजपेयी का कुशलक्षेम जानने अस्पताल पहुंचे थे। रात में केन्द्रीय मंत्री सुरेश प्रभु, जितेन्द्र सिंह, हर्षवर्द्धन और शाहनवाज हुसैन सहित कई नेता और मंत्री अस्तपाल गये थे। इससे पहले केन्द्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी भी वाजपेयी का हाल जानने अस्पताल गयी थीं।

मधुमेह से ग्रस्त वाजपेयी की एक ही किडनी काम करती थी। 2009 में उन्हें आघात आया था, जिसके बाद उन्हें लोगों को जानने-पहचानने की समस्याएं होने लगीं। बाद में उन्हें डिमेशिया यानी भूलने की बीमारी भी हो गई। अब वह किसी को पहचान नहीं पा रहे थे। पूरे दिन नूर कुश्ती के बाद आखिरकार मिडिया चैनलों में ये खबर दोड़ ही गयी.

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