“मैं हिज़ाब में अपने आपको जायदा महफूज़ रख पाती हूँ” चीनी कल्चर छोड़ कर इस्लाम अपनाने वाली महिला की ज़ुबानी

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सिंगापुर चीनी कल्चर छोड़ कर इस्लाम अपनाने वाली नोरा जैस्मिन की जुबानी- मेरा नाम नोरा जैस्मिन है मैं सिंगापुर से हूं और मैंने चीनी कल्चर छोड़ कर इस्लाम अपनाया है अपने कुछ करीबी दोस्त मेरे पति उनका परिवार मेरा परिवार खासतौर पर मेरी मां की मदद से मैंने 11 मई 2013 को इस्लाम अपनाया मेरी मां ने इस बात को माना कि मुझे भी इस्लाम अपना लेना चाहिए हालांकि वह खुद खुद कठिन समय का सामना कर रही थी मैं अपनी मां की बेहद एहसानमंद हूं कि उसने मेरी जिंदगी के इस अहम बदलाव की घड़ी में मेरा साथ दिया अल्लाह का लाख-लाख शुक्र है कि उसने इस्लाम की तरफ आने को मेरे सफर को आसान बनाया।

जब से मुसलमान हुई तब से आज तक हिजाब ना पहनने की बात मेरे दिमाग में कभी नहीं आई – हालांकि कुछ कारणों जैसे कुछ वक्त इंतजार करो, जब तक हमारे बच्चे नहीं हो जाते, या मैं अभी इसके लिए तैयार नहीं हूं के चलते इस्लाम अपनाने के साल भर बाद तक मैंने हिजाब नहीं पहना । हालांकि बहू नस्लीय मुल्क सिंगापुर में रहने के कारण मेरे दिमाग में डर भी था कि मेरे इर्द-गिर्द वाले लोग मेरे पर्दे को स्वीकार नहीं कर पाएंगे।

जब कभी मैं पर्दा करने की सोचती तो निराश हो जाती और मेरे दिल की धड़कन बढ़ने लगती 1 दिन 1 अप्रैल 2014 को मैं अपने पति के साथ पहली बार मस्जिद गई मैं नर्वस थी । क्योंकि मैं नहीं जानती थी कि मस्जिद में किन बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए और मस्जिद में किस तरह के दिशा निर्देशों का पालन जरूरी है । पति के कुछ बातें समझाने के बावजूद मैं असहज थी अल्लाह का शुक्र है कि मैंने वँहा मगरिब की नमाज अदा की और वहां मैंने सुकून महसूस किया।

फिर मैं अगले हफ्ते और मस्जिद गई तो मुझे महसूस हुआ कि मस्जिद में आने वाली औरतों की तरह मुझे भी यंहा हिजाब पहन कर आना चाहिए। मुझे दिल में इस बात का मलाल हुआ कि आखिर मैंने पर्दा करने में साल भर की देरी क्यों कर दी । मेरे पति मेरे बहुत मददगार थे और उन्होंने मुझे इजाजत दे रखी थी कि इस्लाम के मामले में मुझे दिली इत्मीनान हो जाने पर ही मैं इन सब पर अमल करूं।

एक दिन मैंने वर्ल्ड हिजाब डे फेसबुक पेज पर 30 दिनों के लिए हिजाब की चुनौती कैंपेन में हिस्सा लेने का इरादा किया और सोचा कि रमजान महीने के दौरान इस कैंपेन में हिस्सा लेकर हिजाब पहनना दिलचस्प और उत्साहवर्धक रहेगा। मैंने अपनी मां पति और अपने दोस्तों को बताया कि मैं अब हिज़ाब पहनना शुरू कर रही हूं अल्लाह का शुक्र है कि पहले रोजे को पूरे दिन मैंने हिज़ाब पहने रखा अल्लाह का बेहद एहसान है कि वह मुझे फिर से अपने करीब लाया।

मैं पर्दे में खुद को पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित महसूस करती हूं और पर्दे में मेरी ज्यादा इज्जत की जाती है मुझे मुस्लिम होने पर गर्व है मेरे पति को बेहद आश्चर्य हुआ कि इस्लाम अपनाने के एक साल बाद ही मैंने हिज़ाब पहन ना शुरू कर दिया। मुझे बेहद खुशी है कि मैंने अपनी इच्छा से इस्लाम का रास्ता अपनाया उस अल्लाह के लिए उस एक पालनहार के लिए।

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