क्या आपको मालूम है अगर कोई लड़की आप को पसंद आ जाए तो आगे बात बढ़ाने का इस्लामी तरीक़ा क्या है?

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नबी करीम सल्लल्लाहू अलैहे वसल्ल्म (स.अ.व.) ने फरमाया कि, निकाह मेरी सुन्नत है’ इसका मतलब निकाह करना या शादी करना सिर्फ एक कानूनी औपचारिकता ही नही है बल्कि ये पैगम्बर मोहम्मद स.अ.व. की सुन्नत पर अमल करना भी है। ये वास्तविकता शादी करने की अहमियत को कम नहीं करती है। इस्लाम में शादी दो लोगों के बीच कानूनी समझौता है जिसमें दोनों पार्टियाँ समझौतों की सभी शर्तों के लिए राज़ी होते हैं, जिसे एक मज़बूत सम्बंध कहा गया है । निकाह की शर्तें कुछ भी हो सकती है। लेकिन ये शर्तें इस्लामी सिद्धांतों के खिलाफ न जाती हों। ये कोई पवित्र संस्कार नहीं है जो दो लोगों को हमेशा के लिए बंधन में बांधता है।

इसका मतलब ये है कि कुरान की सूरे तलाक़, सूरे अल-बक़रा और सूरे अल-निसा में दर्ज विशेष शर्तों की बुनियाद पर समझौते को खत्म किया जा सकता है। निकाह के वक्त औरत व मर्द दोनों से पूछा जाता है कि क्या उन्हें निकाह कुबूल है, इसका मतलब है कि बिना इनकी सहमति के निकाह अमान्य है। कुरान मोमिनों को हिदायत देता है कि वो औरतों से ज़बरदस्ती शादी न करें। निकाह दरहकीकत एक ऐसा ताल्लुक हैं जो औरत मर्द के दरम्यान एक पाकदामन रिश्ता हैं जो मरने के बाद भी ज़िन्दा रहता हैं बल्कि निकाह हैं

ही इसलिये के लोगो के दरम्यान मोहब्बत कायम रह सके। जैसा के नबी सल्लललाहो अलेहे वसल्लम ने फ़रमाया, हदीस: हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ी अल्लाहु अनहु) से रिवायत हैं के रसूलल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया, के आपस मे मोहब्बत रखने वालो के लिये निकाह जैसी कोई दूसरी चीज़ नही देखी गयी। (इब्ने माजा) हदीसे नबवी से साबित हैं के निकाह औरत मर्द के साथ-साथ दरअसल दो खानदान का भी रिश्ता होता हैं जो निकाह के बाद कायम होता हैं।

इसका अव्वल तो ये फ़ायदा होता हैं के अगर एक मर्द और औरत की निकाह से पहले मोहब्बत मे हो तो गुनाह के इमकान हैं लेकिन अगर उनका निकाह कर दिया जाये तो गुनाह का इमकान नही रहता. दूसरे उनकी मोहब्बत हमेशा के लिये निकाह मे तबदील हो जाती हैं जो जायज़ हैं साथ ही दो अलग-अलग खानदान आपस मे एक-दूसरे से वाकिफ़ होते हैं और एक नया रिश्ता कायम होता हैं। मोहब्बत के साथ-साथ निकाह नफ़्स इन्सानी के सुकुन का भी ज़रिय हैं जिससे इन्सान सुकुन और फ़ायदा हासिल करता हैं।

अल्लाह कुरान मे फ़रमाता हैं, अल-कुरान: और उसी की निशानियो मे से एक ये हैं की उसने तुम्हारे लिये तुम्ही मे से बीवीया पैदा की ताकि तुम उनके साथ रहकर सुकून हासिल करे और तुम लोगो के दरम्यान प्यार और उलफ़त पैदा कर दी| इसमे शक नही गौर करने वालो के लिये यकिनन बहुत सी निशानिया हैं। (सूरह रूम )

हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने मसूद रज़ि0 से रिवायत हैं के नबी सल्लललाहो अलेहे वसल्लम ने फ़रमाया ऐ नौजवानो की जमात तुम मे से जो शख्स निकाह की ताकत रखता हैं इसे चाहिए के निकाह कर ले। इसकी वजह से निगाह नीची रहती हैं और जिस्म बदकारी से महफ़ूज़ रहता हैं और जिसे निकाह की ताकत न हो उसे चाहिए के रोज़े रखा करे क्योकि रोज़ा ख्वाहिशो को कुचल देता हैं। (बुखारी, मुस्लिम, अबू दाऊद, निसाई, तिर्मिज़ी) हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने मसूद रज़ि0 से रिवायत हैं के नबी सल्लललाहो अलेहे वसल्लम ने फ़रमाया हम नबी सल्लललाहो अलेहे वसल्लम के ज़माने मे नौजवान थे। हमे कोई चीज़ मयस्सर न थी।

आप सल्लललाहो अलेहे वसल्लम ने फ़रमाया, नौजवानो की जमात तुम मे से जिसे भी निकाह करने की माली ताकत हो इसे निकाह कर लेना चाहिए क्योकि ये नज़रो को नीची रखने वाला और शर्मगाह की हिफ़ाज़त करने वाला अमल हैं और जो कोई निकाह करने की ताकत न रकह्ता हो इसे चाहिये के रोज़े रखे क्योकि रोज़ा इसकी ख्वाहिशात नफ़सानी को तोड़ देगा। (बुखारी)

हज़रत सहल बिन साद रज़ि0 से रिवायत हैं के एक औरत नबी सल्लललाहो अलेहे वसल्लम के पास आई और अर्ज़ किया के मैं इसलिये हाज़िर हूं के अपनी ज़ात आपको हिबा कर दूं। फ़िर नज़र की नबी सल्लललाहो अलेहे वसल्लम ने इसकी तरफ़ और खूब नीचे से ऊपर तक निगाह की इसकी तरफ़ और फ़िर अपना सर मुबारक झुका लिया और जब औरत ने देखा के आप सल्लललाहो अलेहे वसल्लम ने इसे कोई हुक्म नही दिया तो बैठ गयी और एक सहाबी रज़ि0 उठे और अर्ज़ किया ऐ अल्लाह के रसूल सल्लललाहो अलेहे वसल्लम अगर आप को इसकी हाजत नही तो मुझसे इसका अकद कर दीजिये।

आप सल्लललाहो अलेहे वसल्लम ने फ़रमाया तेरे पास कुछ हैं। इसने अर्ज़ किया कुछ नही अल्लाह की कसम ऐ अल्लाह के रसूल सल्लललाहो अलेहे वसल्लम आप सल्लललाहो अलेहे वसल्लम ने फ़रमाया तो अपने घरवालो के पास जा और देख शायद कुछ पाये। फ़िर वो गये और लौट आये और अर्ज़ किया के अल्लाह की कसम मैने कुछ नही पाया। आप सल्लललाहो अलेहे वसल्लम ने फ़िर फ़रमाया के जा देख अगरचे लोहे का छल्ला हो वो फ़िर गया और लौट आया और अर्ज़ कि अल्लाह की कसम ऐ अल्लाह के रसूल सल्लललाहो अलेहे वसल्लम एक लोहे का छ्ल्ला भी नही है

मगर ये मेरी तहबन्द हैं। सहल रज़ि0 ने कहा के इस गरीब के पास चादर भी न थी। सो इसमे से आधी इस औरत की हैं। नबी सल्लललाहो अलेहे वसल्लम ने फ़रमाया तुम्हारी तहबन्द से तुम्हारा क्या काम निकलेगा के अगर तुमने इसे पहना तो इस पर इसमे से कुछ न होगा और इसने पहना तो तुझ पर कुछ न होगा। फ़िर वो शख्स बैठ गया(यानि मायूस होकर) यहा तक के जब देर तक बैठा रहा तो खड़ा हुआ और जनाब रसूल अल्लाह सल्लललाहो अलेहे वसल्लम ने जब इसको देखा के पीठ मोड़ कर चला, सो आप सल्लललाहो अलेहे वसल्लम ने हुक्म दिया वो फ़िर बुलाया गया।

जब आया तो आप सल्लललाहो अलेहे वसल्लम ने फ़रमाया के तुझे कुछ कुरान याद हैं। इसने अर्ज़ किया के मुझे फ़ला सूरत याद हैं और इसने सूरतो को गिना और आप सल्लललाहो अलेहे वसल्लम ने फ़रमाया के कुरान को अपनी याद से पढ़ सकता हैं। इसने अर्ज़ किया के हां, आप सल्लललाहो अलेहे वसल्लम से फ़रमाया के जा मैने तेरा ममलूक कर दिया(यानि निकाह कर दिया) औज़ मे इस कुरान के जो तुझे याद हैं(यानि ये सूरते इसे याद दिला देना यही इसका मेहर हैं)| (बुखारी, मुस्लिम, तिर्मिज़ि, दार्मी)अल्लाह के रसूल सल्लललाहो अलेहे वसल्लम की इस हदीस से निकाह 

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